An ancient treatment system - Reiki


एक अद्भुत  उपचार-प्रणाली -रेकी 

An amazing healing system - Reiki

क्योंकि मैं जीवन-कल्याण के लिए ही लिखता हूँ, इसी सन्दर्भ में आज एक ऐसे रोग उपचार के पद्धति के बारे में लिखने का विचार बहुत दिनों से कर रहा था जिसका नाम रेकी (reiki) है । यूं तो इस पद्धति का खोज भगवान वुद्ध के द्वारा किया गया था, लेकिन समय के साथ यह विद्या भारत से लुप्त हो गया । और इस विद्या का फिर से उदय हुआ जापान में । 

आइये सबसे पहले रेकी को समझते हैं ।

     रेकी वैकल्पिक चिकित्सा के रूप में प्रयोग किया जाता है, जिसे आमतौर पर अलौकिक उर्जा के द्वारा उपचार के लिए प्रयोग किया जाता है । यह वास्तव में यह उर्जा चिकित्सा का एक रूप है । "रेकी" का शाब्दिक अर्थ जापानी में होता है सार्वभौमिक-जीवन उर्जा

      इस पद्धति में चिकित्सक मरीज को स्वच्छ स्थान पर लिटा देता है और उसके शरीर पर या उसके ऊपर हलके से हाथ रखता है और अपनी हथेली द्वारा उर्जा का हस्तांतरण मरीज के उस स्थान पर करता है जहाँ पर दर्द या कोई परेशानी होती है । इस दौरान चिकित्सक का हथेली बहुत गर्म हो जाता है ,मरीज द्वारा इसको मह्सुश किया जा सकता है । अब आइये जानते हैं जापान में इसका दुबारा उदय कैसे हुआ ।

  यह बात 1920 के सुरुआत कि है जब डॉ.मिकाऊ उसुई द्वारा रेकी को फिर से खोजा गया था, डॉ.मिकाऊ एक कॉलेज में पढ़ते थे, उनको मानव-चिकित्सा, मनोविज्ञान और धर्म-शास्त्र में काफ़ी रूचि थी, किसी दिन एक विधार्थी ने डॉ.मिकाऊ से पूछा - कि यीशु कैसे किसी को छू कर ही ठीक कर देते थे? यह प्रश्न डॉ.मिकाऊ को अन्दर से झकझोड़ दिया, वे काफ़ी परेशान हो गए, एक बात उनको बेचैन कर रही थी कि मेरे अध्यापक होने का क्या लाभ, जबकि मैं विद्यार्थी के प्रश्नों का उत्तर नहीं दे पाया। डॉ.मिकाऊ उसुई इसका खोज करने के लिए दृढ संकल्प ले चुके थे। 

          अगले ही दिन डॉ. मिकाऊ उसुई उठे और कॉलेज से त्यागपत्र दे दिए और अन्न-जल त्याग कर "कुरमा" नामक पहर पर चले गए जो क्योटो के बहुत करीब है। 21 दिनों तक उन्होंने घोर तपश्या किया और खोज किया कि कैसे दैविक उर्जा का प्रवाह उनके शरीर में हो रहा है, 21 वें दिन प्रातः काल में एक प्रकश-पुंज उनके मस्तक से टकडाया, यह एक ऐसा घटना था कि डॉ. उसुई कि ज़िन्दगी ही बदल गई, वे बेहोश हो गए, उन्हें कुछ प्राचीन संस्कृति प्रतीकों को देखा, जिसको उन्हें उपचार कि प्रणाली विकसित करने में मदद मिली

         कुछ घंटों बाद जब उनको होश आया तो काफ़ी भूख का अनुभव हुआ, वे पहाड़ से नीचे आये। उन्होंने किसी को खाना खिलने को कहा। जब वे खाना खा कर उठे तभी, जो आदमी उनको खाना खिलाया था उसकी छोटी-सी बेटी रोतीं हुई आई और बताई कि उअके दंत में काफ़ी दर्द हो रहा है, वहीँ खड़े डॉ.मिकाऊ उसुई को लग रहा था कि आज उनको कुछ अलौकिक चीज मिला है-वे इस बात का परिक्षण करना चाहते थे। डॉ. मिकाऊ उस बच्ची को बुलाकर अपना हथेली उसके गाल पर रख कर देखा तो उसका दर्द बिलकुल गायब ही हो गया। तभी डॉ.मिकाऊ उसुई को लगा कि आज उन्हें कुछ दिव्य शक्ति मिला है जिसका प्रयोग उन्हें मानवता के भलाई के लिए करना चाहिए। यहीं से उसुई रेकी का जन्तम हुआ तब से रेकी का प्रचलन शुरू हुआ। आज पूरे विश्व में इसका प्रचलन है। भारत के प्रमुख शहरों में इसका प्रचलन काफ़ी बढ़ गया है।


        डॉ.मिकाऊ उसुई अपने जीवन काल में लोगों के जीवन-कल्याण के लिए काफ़ी कार्य किये। उन्होंने सभी प्रकार के उपचार प्रणालियों का अध्ययन किया। अंत में वे एक बौध भिक्षु बनकर मानवता के लिए कार्य किये। माउन्ट कुरमा पर अपने आध्यात्मिक जागरण के बाद वे बहुत सारे शिष्य बनाये और इस विद्या को सबसे पहले उनकी एक शिष्य अमेरिका लेकर गयी और वहाँ पर इसका प्रयोग किया गया।


कैसे कार्य करता है रेकी?

हम जीवित हैं क्योंकि जीवन शक्ति हमारे भौतिक शरीर से होकर प्रवाहित होती है। हमारे शरीर में 72000 नशें हैं यही जीवन उर्जा को हमारे शरीर में प्रवाहित करती हुई अंगो और कोशिकाओं को पोषण देती हैं और जब कभी जीवन-शक्ति के प्रवाह में बाधा उत्पन्न होता है तो हमारे भौतिक शरीर के अंगों और कोशिकाओ के ज़रूरी कार्य कम हो जाते हैं या फिर बंद हो जाते हैं और रेकी द्वारा फिर से जीवन उर्जा वहाँ तक पहुचाया जाता है जिसके वज़ह से अंग या कोशिकाएँ दुबारा कार्य करना शुरू कर देता है। यह कोई चमत्कार नहीं है यह एक पूर्ण-विज्ञान है जिसका प्रयोग युशु, कृष्ण, या फिर साईं बाबा किया करते थे।


यह "रेकी" का एक संक्षिप्त परिचय है । अगर आप इसका विस्तार से ज्ञान चाहते हैं तो कमेंट-बॉक्स में लिखें । आज कल रेकी Attunement के नाम पर ठगी का धंधा चल रहा है, उसमे न फसें ।

  

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