क्रोटन के पौधे के औषधीय लाभ और हानि #Advantages and Disadvantages of Croton Plants

 

क्रोटन के पौधे के औषधीय लाभ और हानि 

#Medicinal Advantages and Disadvantages of Croton Plants

यह एक उष्णकटिबंधीय, सदाबहार, अखंड झाड़ीदार पौधा है जो 3 mtr. तक बढाता है और इसमें बड़ी, मोटी और चमकदार पत्तियाँ होती हैं, इसमें विभिन्न रंगों के पैटर्न बने हो सकते हैं। इसके नर फूल सफेद होते हैं, पराग अंडाकार आकार में होते हैं। मादा फूल पीले रंग के होते हैं, जिनमें कोई पंखुड़ी नहीं होती है। फूल की अवधि आमतौर पर शुरुआती शरद ऋतु में होती है। फल में तीन बीज होते हैं। जब काटते हैं, तो दुधिया रस निकलता है। इसको घरों के सजावट के लिए उगाया जाता है लेकिन कम लोगों को पता है कि इसको आयुर्वेदिक औषधी में प्रयोग किया जाता है। सर्दियों में जब तापमान जब 10 डिग्री से0 ग्रे0 से कम हो जाता है तो इसकी पत्तियाँ ज़हर जाति है। अनेक विविधता वाले इस पौधे को ठंढे प्रदेशों में ग्रीन-हाउस में उगाया जाता है।

आम तौर पर सभी प्रजाति के क्रोटन के जड़, तना और पत्तियाँ थोड़ी ज़हरीली होती है, अगर इसको अधिक मात्र में लिया जाय तो, लेकिन फिरभी इसमें कुछ ऐसे तत्व पाए जाते हैं जो हमारे स्वास्थ्य के लिए काफ़ी लाभकारी होता है जैसे:

1.पाचन क्रिया को मजबूत करता है-   (Strengthens digestion)

यदि आप दस्त, मतली और यहाँ तक कि पेचिश से पीड़ित हैं, तो एक क्रोटन इसमें काफ़ी मदद करेगा। चार-पांच पत्तियों को थूर कर पानी में उबाल कर काढ़ा बनाकर पीने से पाचन क्रिया ठीक हो जाता हैं।

2.सर्दी और बुखार में कारगर है-          (Effective in cold and fever)

इसमें एंटीबैक्टीरियल तत्व पाए जातें हैं जिस कारण लोग इसका उपयोग फ्लू, सर्दी और बुखार के लिए औषधि के रूप में करतें हैं। कुछ पत्ते को पानी में उबाल कर गुण-गुणा करके कपडे के सहारे पूरे शरीस को फोछ्ने से बुखार उतर जाता है।

3.दांत दर्द में      (Tooth Ach) -

दांत दर्द में भी इसका प्रयोग किया जाता है। दो-तीन पत्तियों को सुपाड़ी के साथ 2-3 मिनट तक चावते रहने से दंत का दर्द ठीक हो जाता है।

4. मासिक धर्म के लिए–                              (For menstruation)

अगर मासिक धर्म समय पर नहीं हो रहा हो तो 2-3 पत्तियों को चावा कर उसका रस निगलने से मासिक ठीक हो जाता है।

5. सांप के काटने पर (snake bite) -

सांप के काटने पर फर्स्ट-ऐड के रूप में इसकी पत्ती का रस निकाल कर पीने और दंस वाले स्थान पर लगाने ले विष का प्रभाव काफ़ी कम हो जाता है।

6. गोनोरिया में (Syphylis) –

क्रोटन कि कोमल पत्ती का रस निचोड़ कर कोकोनट-मिल्क के साथ मिलाकर लगाने से गोनोरिया ठीक हो जाता है।

7. दाद, खाज, खुजली और दिनाय में–

एंटी-फंगल वाले गुण होने के कारण क्रोटन के छाल और पत्तियों को पीस कर पेस्ट बनाकर लेप चढाने से दाद, खाज, खुजली और दिनाय में काफ़ी फायदा होता है और लम्बे समय तक इसका प्रयोग करने से पुर्णतः ठीक हो जाता है।

8.गैस और अल्सर में–

इसके जड़ का काढ़ा बनाकर पीने से गैस कि समस्या ठीक हो जाति है।

हानि:

ज्यादा मात्रा में लेना हानिकारक होता है। और गर्भवती महिला को इसका सेवन बिलकुल नहीं करना चाहिए।


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