पानी कैसे पीएं ? पानी पीने का नियम , Rules for drinking water

पानी पीने का नियम

Rules for drinking water

जैसा कि हम सभी जानते हैं कि हमारे शरीर में 70% पानी है और यह हमारे शरीर में कई महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाता है-जैसे यह इलेक्ट्रोलाइट को संतुलित करता है जिसके कारण हमारा ब्लड-प्रेसर संतुलित रहता है और सभी जॉइंट में लुब्रिकेंट बनाने में मदद करता है, साथ ही शरीर के तापमान को संतुलित करता है।

हम बचपन से जानते हैं कि पानी कम से कम 7-8 गिलास पानी पीना चाहिए पर कैसे? यह एक ऐसा कार्य है जिसको हम सभी, दिन में कई बार करते हैं-लेकिन क्या हम सही तरीके से पानी पीतें हैं?

आइये जानतें पानी पीने का नियम क्या है ...

1. सुबह में जब हम उठतें हैं तो पानी ज़रूर पीना चाहिए।

When we wake up in the morning, water must be taken .

सोकर उठाने के बाद पानी पीना लाभकारी है और गुनगुना पानी पीना ज़्यादा लाभकारी है। सुबह उठाने के तुरंत बाद जब हम पानी पीते है तो उस समय हमारा पेट खाली होता है, तो पानी विषाक्त पदार्थों को अपने साथ बहार निकलने में कारगर होता है।

2. खाने से पहले (Before eating) 

खाना खाने से लगभग एक घंटा पहले ही पानी पी लेना चाहिए।

3. खाने के बाद- (after eating) 

बाग भट्ट जी के द्वारा बताया गया सूत्र है-भोजनान्ते बिषम्बारी-यानी भोजन के अंत में पानी पीना बिष पीने के बराबर है। सिर्फ़ "आचमन" करना चाहिए यानी एक-दो घूंट पानी पी सकतें हैं। अगर ज़्यादा ज़रूरत हो तो मट्ठा या जुश पी लेना चाहिए।

अगर खाने के तुरंत बाद ही या खाने के साथ ही पानी पीते हैं तो दो हानि होता है एक तो हमारे पेट का पचाने वाला तरल पदार्थ पानी के साथ घुल जाता है और पचाने में जितना सहयोग करना चाहिए नहीं कर पता है। दूसरा कारण यह है कि जब हम खाना खाते हैं तो जठराग्नि जागृत हो जाता है और भोजन पचाने का कार्य शुरू कर देता है लेकिन उस दौरान अगर पेट में पानी चला जय तो यह अग्नि शांत हो जाता है और पचने की प्रक्रिया बाधित हो जाती है।

4. नहाने से पहले (Before bathing) 

नहाने से पहले पानी पीने के भी दो फायदे हैं एक तो हमारे शरीर के टेम्परेचर को नहाने के अनुकूल बना देता है और दूसरा ब्लड-प्रेसर को नियंत्रित कर देता है।

5. सोने से पूर्व (Before going to bed) 

ज्यादातर लोग बिस्तर पर जाने से तुरंत पहले पानी पीते हैं लेकिन यह ठीक नहीं होता है। सोने से एक घंटा पूर्व ही पानी पी लेना चाहिए। अगर सोने से दो घंटा पहले आप खाना खा लेते हैं तो आप ऐसा कर पाएंगे।

6. कितना पानी पीना चाहिए  (How much water should be Taken) 

हर दो घंटे बाद एक गिलास पानी पीना चाहिए। इतना ध्यान रखना चाहिए कि खाने से एक घंटा पहले और एक घंटा बाद तक पानी नहीं पियें। शुरू में तो कुछ दिन कठिन लगेगा लेकिन कुछ ही दिनों बाद आदत बन जाने के बाद पेट हल्का महसूस होगा और मन खुश रहने लगेगा।

ऐसा आयुर्वेद में बताया गया है कि हमारे शरीर के कुल वज़न का 10 प्रतिशत में से दो घटाने पर जितना बचता है उतना ही पानी पीना चाहिए। आइये इसको एक उदहारण से समझतें हैं-मान लिया कि आपका कुल वज़न 60 किलो है तो उसका 10 प्रतिशत हुआ 6 किलो और उसमे से 2 घटाने पर बचा 4. इसका मतलब हुआ कि जिनका वज़न 60 किलो है उनको लगभग 4 लीटर ही पानी पीना चाहिए। ज़्यादा पानी पीना भी हानि पहुचता है सदैव याद रखें।

7. पानी को चुस्कियाँ लेकर पियें

 (Drink water with Sip) 

पानी को बोतल से डायरेक्ट गटकने से पानी में लार नहीं मिल पाता है और पेट में जाने के बाद पानी अम्लीय हो जाते हैं और गैस, मोटापा, अपच जैसे बीमारी पैदा होते। इस लिए पानी गटक कर नहीं पीयें ।

8. गुनगुना पानी पीना चाहिए

 we Should drink lukewarm water

आयुर्वेद में गुनगुने पानी को शरीर के लिए अमृत कि भांति बताया गया है। जब हम ठंढा पानी पीतें हैं तो हमारा शरीर उस ठंढे पानी को गरम करने में लग जाता है और इस कार्य को पूरा करने के लिए खून को पेट कि तरफ़ आना होता है जिसके कारण दुसरे अंगों को सही मात्रा में ब्लड सप्लाई नहीं हो पता है इसका दुस्प्रभाव ये होता है, कि कोई अंग शिथिल पड़ने लगता है और लगातार ऐसे ही करते रहने से कोई अंग कमजोड पर सकता है.

पानी हमारे शरीर का मुख्या तत्व है यह हमारे शरीर का 72% हिस्सा है। तो हमें अपने शरीर के मुख्य तत्व को ठीक रखना आवश्यक है। इस लिए इन बातों का ख़याल रखना चाहिए.

9.पानी को धातु या मिश्रित धातु के बर्तन में ही रखना चाहिए. ताम्बे का बर्तन प्रयोग करना भी लाभकारी है।

ताम्बे के बर्तन में रात भर जल भर कर छोड़ दें और सवेरे उठाने के बाद उसका सेवन करें , चरम रोग में लाभ होता है 


"जो ताम्र पात्र में पिए रोज जल छान।                चर्म रोग सब दूर हो,मनुष्य होय बलवान।।"

Water should be stored in a metal vessel or mixed metal vessel. It is also beneficial to use copper utensils.

10. पीने के पानी के बर्तन को पवित्र स्थानों पर ही रखें, इसके वर्तन को कूम-कूम से चन्दन कर आरती करनी चाहिए और पुष्प अर्पित करना चाहिए।

Keep the pot of drinking water in the clean place, we should chant arti and offer flower to the drinking water before drinking.

11. पानी पीने से पहले अपने मन में कृतज्ञता का भाब मन में रखना चाहिए।

Before drinking water, the feeling of gratitude should be hovering in your mind.

12. अपने शरीर के तापमान से 4 डिग्री के अंतर तक ही पानी पीना चाहिए।

Water should be taken only up to 4 degree difference from your body temperature.

मान लीजिये आपके शरीर का तापमान 36 डिग्री है तो आप ऊपर 40 डिग्री या निचे 32 डिग्री तक के तापमान तक पानी पीना चाहिए।

         आज ये दर्शाने के लिए पर्याप्त बैज्ञानिक प्रमाण हैं कि पानी में यादास्त होतें हैं। ऐसा कई बार बैज्ञानिकों द्वारा प्रयोग किया गया है-शीशे के गिलास में पानी रखा गया और उसको देखते हुए मन में कोई ख़ास विचार बार-बार दोहराया गया उसके बाद उसका आणविक परीक्षण किया गया तो पाया गया कि उसका एटॉमिक स्ट्रक्चर में बदलाव आ गया और उसी पानी को देखते हुए दूसरा विचार दोहराया गया तो उसका आणविक स्ट्रक्चर फिर बदल गया। इस विज्ञान को भारत के ऋषि मुनियों ने सदियों से जानतें आ रहें हैं और अब आधुनिक वैज्ञानिक भी मानने लगे हैं।

        एक बून्द पानी के लिए लोग मंदिर में जाकर लाइन में खड़े चरणामृत ग्रहण करतें हैं, हम इसको इतने आदर के साथ लेते हैं, क्यों? क्योंकि हम जानतें है कि चरणामृत में ईश्वर की स्मृति है, ईश्वर का पवित्रता है और हम उस पवित्रता को अपने अंदर लेना चाहते हैं। क्योंकि वैसा पवित्र बनाना चाहतें हैं ।

पानी पीने के तरीकों को बदल कर हम पुरानी से पुराणी बिमारियों पर भी विजय पा सकते हैं। आज के इस आधुनिक जीवन शैली में इन सब बातों के लिए कोई जगह नहीं है, जो हमारे जीवन का निर्माण करतें हैं, इसी कारण हम बिमारियों को ख़ुद अपने अंदर पैदा करते हैं।

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