How many chakras are there in our body and what are their function? # हमारे शरीर में कितने चक्र हैं और इनका क्या कार्य है। ?

 हमारे शरीर में कितने चक्र हैं और इनका क्या कार्य है। ?

अलौकिक जीवन ऊर्जा को संग्रहित करने के लिए हमारे शरीर में हमारे शरीर में वैसे तो 112 चक्र बताए गए हैं लेकिन मुख्य रूप से सात चक्र ही माने जाते हैं। इसी अलौकिक जीवन-ऊर्जा को आज के शोधकर्ता वाइटल एनर्जी कहते हैं।

      जिस मनुष्य में अलौकिक जीवन ऊर्जा का प्रवाह और संग्रह जितना अधिक होता है वह मनुष्य भौतिक स्तर पर उतना ही स्वस्थ होता है और मानसिक स्तर पर सफल होता है। इसलिए हर मनुष्य को अपने चक्रों के बारे में थोड़ा बहुत थोड़ा बहुत तो संवेदनशील होना ही चाहिए.

      भारतवर्ष में चक्र को जागृत करने के अनेक विधि-विधान मौजूद है, लेकिन आपकी जानकारी के लिए बता दूँ कि आजकल रेकी के माध्यम से अपने चक्र को जागृत करते हैं और बदले में भारी मूल्य भी चुकाते हैं।

शरीर में चक्र कहाँ पाए जाते हैं?

मनुष्य के शरीर में मुख्य रूप से 7 ऊर्जा के केंद्र होते हैं जिनको अलग-अलग सात चक्रों के नाम से जानते हैं। यह सातों चक्र स्पाइनल कॉर्ड यानी रीड की हड्डी के अलग-अलग हिस्सों में पाए जाते हैं।

   आज हमलोग इन्हीं 7 चक्रों के बारे में जानने और समझने का प्रयास करेंगे। इन सातों चक्र में से छह चक्र तो स्पाइनल कॉर्ड में होते हैं और सातवां चक्र मस्तक के ऊपरी भाग पर होता है।

1. मूलाधार चक्र-Root Chakra-

स्थान-

गुदा और लिंग के बीच मूलाधार चक्र होता है।

रंग    -लाल

तत्व-  पृथ्वी

प्रभाव-जीवन में असंतुलन पैदा हो जाता है और कार्यों का वांछित फल नहीं मिलता है।

पहचान-

जो लोग भोग-विलास और सम्भोग में लिप्त रहतें हैं और ज़्यादा सोते हैं इसका मतलब है कि वह व्यक्ति चेतना के स्तर पर इसी चक्र में फंसे हैं। और इससे ऊपर उठाने का अगर प्रयास नहीं करेंगें तो वे इसी चक्र में हीं मर भी जातें हैं।

मनुष्य कि चेतन जबतक मूलाधार चक्र पर ही अटकी राहती है। तब तक मनुष्य का जीवन केवल एक पशु की भांति ही होता है।

मूलाधार चक्र को जागृत करने कि विधि:

** आप कि रीढ़ कि हड्डी जहाँ से शुरू होती है वहीँ पर अपना ध्यान केन्द्रित करें और इस वाक्य को 11 दोहराएँ-

" मैं बिलकुल ज़मीन से जुड़ा व्यक्ति हूँ। मै शक्तिशाली हूँ, मैं सुरक्षित हूँ।

** मूलाधार चक्र का मंत्र होता है- "लं" इस मंत्र को 21 बार जप करे। जप करते समय भी आपका ध्यान मूलाधार चक्र पर ही होना चाहिए.

2.स्वाधिष्ठान चक्र-sacral chakra

स्थान-   इस चक्र का स्थान गुदा और नाभि के बीच में होता है।

रंग  -  नारंगी

तत्व  -पानी।

प्रभाव  -अगर यह चक्र स्थिल हो जाता है तो मनुष्य पापी प्रवृति का हो जाता है। उसको पाप करने में मज़ा आने लगता है।

स्वाधिष्ठान चक्र जागृत करने कि बिधि-

** "मैं भरपूर क्षमता वाला एक रचनात्मक व्यक्ति हूँ" इस वाक्य को 11 वार मन में दोहराते हुए अपने नाभि से चार उंगली नीचे अपने ध्यान को केन्द्रित करें और वहाँ नारंगी रंग देखने का प्रयास करें।

** स्वाधिष्ठान चक्र का मंत्र है- "वं" इस मंत्र का ज़प 21 वार स्वाधिष्ठान चक्र केंद्र पर अपना ध्यान केन्द्रित करते हुए करें।

3.मणिपुर चक्र-

स्थान -  इसका स्थान नाभि से दो उंगली ऊपर होता है।

रंग -पीला

तत्व -अग्नि होता है।

प्रभाव -जिन लोगों कि चेतना ऊपर उठ कर मणिपुर चक्र पर केन्द्रित हो जाती है, वह व्यक्ति कर्मयोगी हो जाता है। वह जिस भी चीज में लगता है उसको पूर्ण करके हीं दम लेता है।

मणिपुर चक्र जागृत करने कि बिधि-

** मैं समर्थवान हूँ और मैं कर सकता हूँ। " इस वाक्य को 11 वार मन में दोहराते हुए नाभि चक्र पर अपना ध्यान केन्द्रित करें और पीला रंग देखने का कोशिश करें।

** मणिपुर चक्र का मंत्र है- "रं" इस मंत्र का ज़प 21 बार नाभि चक्र पर ध्यान केन्द्रित करते हुए और पीला रंग को देखतें हुए करें।

4.अनाहत चक्र-

स्थान -ह्रदय के समीप,

रंग  -हरा।

तत्व  -वायु,

प्रभाव -अगर किसी मनुष्य कि चेतना अनाहत चक्र तक पहुँच गई है। तो वह व्यक्ति सृजनात्मक हो जाता है। वह हमेशा कुछ नया करने कि कोशिश करता रहता है। अक्सर वह चित्रकार या कहानीकार होता है और दिल से कोमल और भावुक होता है। और जिनका अनाहत चक्र एक्टिव नहीं है वह इन गुणों के बिपरीत होगा।

अनाहत चक्र जागृत करने कि विधि-

** मैं उन लोगों को क्षमा करता हूँ जिन्हों ने मुझे तकलीफ दिया है और उन लोगों से क्षमा याचना करता हूँ जिनको मैंने तकलीफ दिया है।

** अनाहत चक्र का मन्त्र होता है। "यं" इस मंत्र का जप 21 वार अपने ह्रदय पर ध्यान रखतें हुए और हरे रंग का स्मरण करते हुए करें।

5. विशुध्धि चक्र-

स्थान -कंठ

रंग-नीला,

तत्व-आकास

प्रभाव-जिन लोगों कि चेतना ऊपर उठ कर विशुध्धि चक्र तक पहुँच जाती है। उनलोगों का स्वर काफ़ी मीठा हो जाता है। , आम तौर पर वे वक्ता, गायक या कथा वाचक होतें हैं। उनकी वाणी लोगों को मोहित करतीं हैं। झूठ बोलने वाले व्यक्ति के विशुध्धि चक्र कमजोर हो जातें हैं।

विशुध्धि चक्र जागृत करने कि विधि-

** "मैं जब भी बोलता हूँ सच बोलता हूँ।" इस वाक्य को 11 वर जप करें और अपना ध्यान विशुध्धि चक्र पर हीं रखें। ** विशुध्धि चक्र का मन्त्र है। - "हं" इस मन्त्र का जप 21 बार विशुध्धि चक्र पर ध्यान केन्द्रित करते हुए करें और नीला रंग का स्मरण करें।

6. आज्ञा चक्र-

स्थान-  दोनों भौं के बीच मस्तक पर,

रंग  -बैगनी

सम्बन्ध   -तत्व तो सिर्फ़ पांच हैं इस लिए आज्ञा चक्र का सम्बन्ध आतंरिक ज्ञान से होता है।

प्रभाव  -जिन लोगों का आज्ञा चक्र सक्रिय हो जातीं उनकी समस्त शक्तियाँ जाग जातीं हैं। वह व्यक्ति ज्ञानवान, चरित्रवान, संवेदनशील और अकाल दृष्टि वाले हो जातें हैं। वे समय से पूर्व ही चीज़ों को देख पातें है। लेकिन शंका आज्ञा चक्र को कमजोर करता है।

आज्ञा चक्र जागृत करने कि विधि-

** मैं सहज, आत्म-विश्वासी और स्वतंत्र विचारों वाला व्यक्ति हूँ-इस वाक्य का जप 11 वार करें।

** आज्ञा चक्र का मन्त्र- "ॐ" है। इसका उच्चारण 21 वार आज्ञा चक्र पर ध्यान केन्द्रित करके करें।

7.सहस्त्रार चक्र-

स्थान  -सिर का सबसे उपरी भाग। सहस्त्रार चक्र का स्थान होता है।

रंग  -हल्का बैगनी और हल्का नीला

सम्बन्ध -। सहस्त्रार चक्र का सम्बन्ध ब्रह्ममांड के जीवन-उर्जा से होता है।

प्रभाव  -अपनी सम्पूर्ण चेतना को बढ़ाते हुए जो मनुष्य सहस्त्रार चक्र तक पहुँच जाता है तो वह आनद कि स्थिति में अवस्थित हो जाता है। वह सांसारिक चीजों से ऊपर उठ जाता है। वह परमात्मा के सामान हो जाता है।

सहस्त्रार चक्र जागृत करने कि विधि:-

** मैं शुध्ध चेतना के लिए अपने ज्ञान को समर्पित करता हूँ। -इस वाक्य को 21 वार दोहराएँ।

** सहस्त्रार चक्र का मन्त्र भी ॐ ही है। -इसका जप 21 वार करें।


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