What is the science of Tilak? तिलक लगाने का क्या है विज्ञान?

 तिलक लगाने का क्या है विज्ञान?

What is the science of Tilak?



सनातन धर्म में माथे पर तिलक का एक विषेश महत्त्व है। किसी प्रकार के धर्मीक कार्य, कर्म-काण्ड या पूजा पाठ में तिलक लगाने कि परंपरा है। तिलक लगाने से मन एकाग्रचित तो रहता ही है साथ में अध्यात्मिक विचारों का भी जन्म होने लगता है। तिलक लगाने का कार्य तो लोग श्रद्धा पूर्वक करते तो हैं, लेकिन, बहुत कम लोगों को इसके पीछे का विज्ञान पता है।

          सनातन धर्म में तिलक के बिना कोई भी पूजा-पाठ को तिलक के बिना पूर्ण नहीं माना जाता है। धर्म शास्त्रों में बताया गया है कि कोई भी धार्मिक कार्य या दान-पुण्य  बिना तिलक के कोई फल नहीं देता है। माथे के अलावा शरीर के कई भागों में भी तिलक लगाने कि परंपरा विधमान है जहाँ पर चेतना होता है। लेकिन साधारण रूप से तिलक माथे पर ही लगाया जाता है जहाँ आज्ञा चक्र होता है।

          सम्पूर्ण मानव जाति अपने क्षमता के अनुरूप ज्ञान कि तालाश करता है और आज्ञा चक्र को ज्ञान का द्वार कहा जाता है। आज्ञा चक्र पर तिलक लगाने का यही विज्ञान है कि जब वहाँ तिलक लगाया जाता है तब मनुष्य का चेतना आज्ञा चक्र पर केन्द्रित हो जाता है।

         चेतना ठीक वैसे ही हमारे लिए कार्य करता है जैसे कि सूर्य कि किरणे पूरे संसार को प्रकाशित करता है। लेकिन थोड़े प्रकाश को किसी लेन्स के माध्यम से अगर केन्द्रित कर लें, तो वह आग पैदा कर देता है।

      चेतना शरीर पर फैली  रहती है तो सिर्फ़ जीवन का काम चलाऊ उपयोग उससे होता है। चेतना अगर तीसरे नेत्र के पास अगर पूरी तरह इकठ्ठी हो जाये, तो तीसरे नेत्र का बंद-पन टूट जाता है। और आप उस चीज़ को देखने में समर्थ हो जातें हैं जो एक साधारण आदमी नहीं देख पाता है। तब आप एक असाधारण मनुष्य हो जातें है।

किस चीज से तिलक करना चाहिए?

कुम -कुम और हल्दी पाउडर को बराबर मात्रा में मिला लें और उसको चुना के पानी में घोल कर तिलक लगायें ।

        इसके आलावा गंगा कि मिट्टी, किसी और पवित्र नदी कि मिट्टी, तुलसी के जड़ कि मिट्टी, किसी पहाड़ के चोटी कि मिट्टी या चींटी के बिल कि मिट्टी का तिलक भी हिन्दू धर्म शास्त्र में बतलाया गया है।

      ज्ञानी पुरुषों कि माने तो पुरुषों को चन्दन का तिलक करना चाहिए और स्त्रियों को कुम-कुम का तिलक कारण चाहिए।

 
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