Why childhood is important in our life in Hindi? हमारे जीवन में बचपन क्यों महत्त्वपूर्ण है

Why childhood is important in our life ?

हमारे जीवन में बचपन क्यों महत्त्वपूर्ण है



1975 में एक फ़िल्म आई थी जिसका नाम था-गीत गाता चल । इस फ़िल्म का एक गाना बहुत लोकप्रिय हुआ था- "बचपन हर ग़म से बेगाना होता है"। यह गीत आज भी उतना ही सार्थक प्रतीत होता है जितना कि उस समय रहा होगा, इस गाने को लिखा था रविन्द्र जैन ने और गाया था किशोर कुमार ने ।

           आज भी कोई भी व्यक्ति इस गाने को सुनाता है तो अपने बचपन के उन मस्ती भरे पलों को याद किये बिना नहीं रह पाता है। आदमी अपने बचपन कि बातों को जीवन-पर्यंत याद रखता है।

              कुछ लोगों का मानना है कि जीवन का सबसे अच्छा भाग बचपन का होता है , वहीं पर कुछ लोग मानते हैं कि बचपन के बाद कि ज़िन्दगी ज़्यादा महत्त्वपूर्ण होती है। इस संदर्भ में मेरा मानना है बचपन संपूर्ण जीवन का आधार होता है। किसी भी व्यक्ति के मानसिक स्तर का निर्माण बचपन के समय में ही होता है।


 

                बचपन का समय, वह समय होता है ,जब एक तरफ़ तो शारीरिक विकास हो रहा होता है ,और दूसरी तरफ़ मानसिक विकास होता है। 

               इस समय बच्चे अपने आसपास के लोगों को, चीजों को, पेड़ पौधों को और जानवरों को देख कर समझने का प्रयास करते हैं।

              ज्यादातर बच्चों का झुकाव किसी ख़ास हुनर के प्रति बचपन में ही हो जाता है ,और आगे चलकर उस क्षेत्र में  कुछ अनोखा कर जाते हैं। 

               वैसे तो कोशिश करके किसी भी हुनर को आदमी किसी भी उम्र में सीख सकता है। लेकिन बचपन में सीखा गया कोई कला या हुनर किसी बच्चे को आगे चलकर किसी विशिष्ट स्थान की प्राप्ति में सहयोग करता है।



क्यों महत्वपूर्ण होता है बचपन ?

Why is childhood important?

लोगों और समाज के प्रति दृष्टिकोण

Attitude towards people and society

              बचपन में जैसा दृष्टिकोण का निर्माण हो जाता है वह जीवन पर्यंत बना ही रहता है। किसी लोगों के प्रति या समाज के प्रति बचपन में जैसा दृष्टिकोण बन जाता है आगे चलकर बदलाव कि संभावना बहुत कम होती है।

            कई फ़िल्मों कि कहानियों में या समाज में आपने देखा होगा, जिस व्यक्ति के बचपन   में लोगों के द्वारा या समाज के द्वारा प्रताड़ना मिला हो उन लोगों का दृष्टिकोण, समाज के प्रति या लोगों के प्रति, सामान्य व्यक्तियों से अलग होगा।

अपने प्रति दृष्टिकोण

Self attitude

                   1 वर्ष से 6 वर्ष तक बच्चे अपने आस-पास के चीज़ों को ग़ौर से निरिक्षण करतें हैं ,और सीखातें हैं।  इसी क्रम में वे अपने बारे में भी एक दृष्टिकोण बना  लेतें  हैं जिनका प्रभाव उनके आने वाले जीवन गहरा असर डालता है।

                मान लीजिये कोई बच्चा बचपन से यह सुनते आया है कि वह गरीब है, या यह सुनते आया है कि वह निम्न जाति का है , तो उसकी दृष्टिकोण अपने प्रति भी वैसा हीं होगा ।

              वह पूरी ज़िन्दगी मान लेगा कि वह गरीब है अथवा नीची जाती का है। अधिकांश केश में ऐसा होता है।

मस्तिस्क का विकास-

Development of brain

एक वर्ष से पंद्रह वर्ष तक मस्तिष्क का विकास जितना हो जाता है उतना आगे कि ज़िन्दगी में नहीं होता है, और इसका प्रभाव आने वाली ज़िन्दगी पर भी पड़ता है। इस लिए बचपन के दिनों में बच्चों के मस्तिष्क के विकास पर ज़रूर ध्यान देना ज़रूरी होता है।

मानसिक विकास-

Mental Growth-

बचपन के दिनों में बच्चे अत्यधिक कर्मशील और ग्रहणशील होतें हैं। जहाँ तक मानसिक विकास कि बात है तो बचपन हीं मनुष्य के मानसिक विकास के लिए सबसे अनुकूल अवस्था होती है।

चरित्र का निर्माण

Character Building

चरित्र का निर्माण का निंब भी बचपन में ही होती  है। बच्चा जैसा आचरण अपने माता-पिता या आस-पास के लोंगो का देखता है वैसा ही चरित्र का निर्माण करता है। आचरण और चरित्र के सम्बन्ध में बच्चे सबसे ज़्यादा अपने माता-पिता से ही प्रभावित होतें हैं।

स्वर्णिम यादें-

Golden Memories

पूरी ज़िन्दगी बचपन कि यादें इंसान को आंदोलित करतीं राहती हैं। कोई भी व्यक्ति हो, चाहे किसी भी उम्र का हो। अगर आपको दुसरे लोगों का ध्यान अपनी ओर खींचना है ,या चाहतें हैं कि वह आपको नोटिस करे, तो मौका देखकर बचपन कि कुछ बातें पूछ लें ।

       इसका प्रभाब क्या पड़ेगा? उनका नज़रिया आप के प्रति बदल जाएगा। उनके ह्रदय में आपके प्रति सॉफ्ट कार्नर हो जायेगा।

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