Why should you do vipassana?

आप को  विपश्यना क्यों करना चाहिए ?

Why should you do vipassana?


हम विश्व स्तर की बात करें तो पूरे विश्व में एक युद्ध जैसा माहौल बना हुआ है। अगर हम समाज की बात करें तो पूरे समाज में, समाज के हर तबके में, समाज के हर स्तर में लोग नफ़रत और घृणा कि भावना से भरे हुए हैं और चारों ओर लोग दुखी हैं।

         बुद्ध धम्मा यानी बौद्ध धर्म, आज के समय में एक वास्तविक ज़रूरत है और बौद्ध धर्म अपने वास्तविक रूप से इतना सरल है किसका धारण कोई भी आसानी से कर सकता है... बौध-धम्मा के वास्तविक ज्ञान को अगर लोग समझ लें तो मुझे नहीं लगता कि कोई भी व्यक्ति इसके सिद्धांत को काट पाएगा।

        हम लोग बहुत ही सौभाग्यशाली हैं कि परमात्मा ने हमें भगवान बुद्ध की धरती पर जन्म  दिया। बुद्ध के द्वारा दिया गया विपश्यना का ज्ञान दुर्भाग्य से भारत की धरती से सदियों पूर्व ही विलुप्त हो गया।

       लेकिन उस अलौकिक ज्ञान को फिर से भारत भूमि की धरती पर लाने वाले श्री एस.एन. गोयनका जी को मैं इस कार्य के लिए कोटि-कोटि धन्यवाद अर्पित करता हूँ।

        यह एक ऐसा ज्ञान है जिसका अभ्यास कर के आदमी सिर्फ़ शांति को ही उपलब्ध नहीं होता बल्कि मानसिक रूप से और शारीरिक रूप से बिल्कुल स्वस्थ हो जाता है।विपश्यना का ज्ञान सर्वप्रथम भगवान बुद्ध को हुआ था।

       भगवान बुद्ध ने मानव दुखों का कारण जानने हेतु लगभग 6 वर्षों तक भ्रमण किया लेकिन उनको कोई लाभ नहीं मिला। तत्पश्चात उन्होंने अपने अंदर जाने का संकल्प लिया और इसी ध्यान के प्रयोग से उन्होंने बुद्धत्व को प्राप्त किया।

विपश्यना का अर्थ क्या है:-

What is the meaning of Vipassana: -

विपश्कायना  अर्थ होता है किसी चीज को ख़ुद से जानना। जानने का अर्थ है कि आप किसी कार्य को करते हैं और परिणाम को ख़ुद से महसूस करते हैं। मानने का अर्थ है कि आप किसी दूसरे के बताएँ ज्ञान को सिद्धांत मना लेना और आज के समय में लोग जाने के बजाय मानकर ही अपना काम चलाना पसंद करते हैं क्योंकि लोगों को सुविधावादी ही हो गए हैं।

विपश्यना के सिद्धांत के सिद्धांत क्या है?

What is the principles of Vipassana?

1. चोरी नहीं करना

2. नशा नहीं करना,

3. हिंसा नहीं करना

4. ब्रह्मचर्य का पालन करना,

5.कठोर शब्दों का प्रयोग नहीं करना,

विपश्यना करने का सही समय क्या है:-

What is the right time to do vipassana: -

विपश्यना करने का सही समय ब्रह्म मुहूर्त होता है, जैसा कि आपको ज्ञात होगा कि ब्रह्म मुहूर्त सूर्योदय से लगभग 2 घंटा पहले शुरू होता है और 20: 25 मिनट तक ब्रह्म मुहूर्त का समय होता है। इसी समय विपश्यना ध्यान का अभ्यास करना सर्वोत्तम माना गया है।

कैसे करें विपश्यना ध्यान?

How to Do Vipassana?

1. ब्रह्म मुहूर्त में उठकर, नित्य क्रिया से निवृत्त होकर, किसी पवित्र और एकांत स्थान पर बैठ जाएँ,

2. बैठने का सही तरीका-पालथी मारकर बैठना चाहिए, रीढ़ सीधी होनी चाहिए, गर्दन सीधी होनी चाहिए, दोनों हाथ घुटनों पर होनी चाहिए, आप किसी भी मुद्रा का उपयोग कर सकते हैं-जो आप को सही लगता है।

3. धीरे-धीरे अपने मन को शांत करें ,और ध्यान अपनी सांसो पर रखें। सिर्फ़ इसी बात पर ग़ौर करें कि साँस कैसे आ रही है और कैसे जा रही है।

4. मन में अगर कोई विचार आए तो उसको जाने दे और फिर से अपने ध्यान को सांसो पर टिका है।

5. सिर्फ़ सांसो पर ध्यान देने की क्रिया को एक सप्ताह तक करते रहें उसके उपरांत हीं इस क्रिया में आगे बढ़ें ।

विपश्यना करने से क्या लाभ होते हैं?

1. विपश्यना करने से मन को शांति मिलती है।

Vipassana brings peace of mind.

मन को शांत करने का सबसे अच्छा तरीका है विपश्यना करना 

2. जटिल बीमारी भी विपश्यना करने से ठीक होता है 

Complex disease is also cured by doing Vipassana.

जटिल बीमारी भी लंबे समय तक विपश्यना के अभ्यास से छूट जाते हैं। क्योंकि विपश्यना के अभ्यास से हमारे भौतिक शरीर में जीवन ऊर्जा का प्रवाह बहुत बढ़ जाता है जिसके कारण हमारे शरीर की बीमारियाँ जाती रहती हैं।

3.मानसिक रोगों  से मुक्ति 

Freedom from mental diseases

मानसिक रोगों के लिए विपश्यना एक के दिव्य औषधि की तरह कार्य करता है। जो व्यक्ति किसी भी प्रकार के मानसिक रोग से ग्रसित हैं उनको ध्यान तो अवश्य करना चाहिए. या एस. एन. गोयनका जी का 10 दिनों का विपश्यना शिविर कर लेना चाहिए.

4."स्व" की संपूर्ण जागरूकता

self awareness of 

 विपश्यना अपने आपको जानने की एक लंबी प्रक्रिया है। लंबे समय तक अभ्यास करने के बाद आदमी सच्चे "स्व" की संपूर्ण जागरूकता कि स्थिति में आ जाता है।

5. एकाग्रता में सुधार-

 Improvement in concentration

विपश्यना के अभ्यास से दिमाग़ का एकाग्रता बढ़ता है, इस कारण बच्चे और विद्यार्थियों को का अभ्यास बचपन से ही करना चाहिए.

6. विचारों पर नियंत्रण-

Controls thoughts -

विपश्यना के अभ्यास करने से विचारों पर नियंत्रण हो जाता है। मन की चंचलता को संतुलित करने के लिए विपश्यना एक अच्छा अभ्यास माना जाता है।

7. चुनौतियों का सामना करने की शक्ति-

Power to face challenges

बिपाशा के अभ्यास से मन इतना सशक्त हो जाता है कि आप जीवन में आने वाले किसी भी चुनौतियों का सामना बैठकर कर सकते हैं।

8. मन की स्थिरता-

Stability of mind

विपश्यना करने वाला व्यक्ति हमेशा एक समान स्थिति में रहता है मैं तो ज़रूर से ज़्यादा दुखी होता है और ना ही ज़रूरत से ज़्यादा खुश होता है। चाहे परिस्थिति कुछ भी हो उपासना करने वाला सच्चा व्यक्ति हमेशा समता में अवस्थित रहता है।

9.वर्तमान में जीना सिखाता है-

Live teaches Live in the present moment-

विपश्यना मेडिटेशन के एक चरण में-    मन में एक बात बार-बार दोहराया जाता है-अनित्य है, अनित्य है, अनित्य है।

       इसका मतलब यह हुआ कि मन हमेशा या तो भूतकाल में जीता है या भविष्य काल में जीता है और बहुत गालियाँ भविष्य काल की बातों को सोच कर या तुम दुखी होता है या खुश होता है। लेकिन इस प्रक्रिया में इस बात का प्रेक्टिस करवाया जाता है कि संसार में कुछ भी स्थाई नहीं है।

      यानी आज कोई दुखी है तो कल वह खुश होगा और आज जो आज खुश है वह कल दुखी भी होगा। तो क्यों किसी बात को पकड़ कर प्रेजेंट समय में अपने आप को प्रभावित करें।

    भगवान कृष्ण कहते हैं कि संसार में कोई ऐसा चीज़ घटित नहीं होता जिस से बहुत अधिक खुश हुआ जाए और कोई ऐसी घटना घटित नहीं होती, जिससे बहुत ज़्यादा दुखी होना परे।

   यह तो सिर्फ़ एक मोह है जो हमें किसी व्यकि या वस्तु से बाँधे रखता है और वास्तव में यह एक भ्रम ही है और कुछ नहीं।

10. मोक्ष की ओर यात्रा-

Journey towards Moksha

विपश्यना का अंतिम लक्ष्य मोक्ष को पाना है... ऐसा बिल्कुल भी नहीं है कि अगर आप आज से विपश्यना लगेंगे तो आप को मोक्ष की प्राप्ति हो जाएगी। मोक्ष की प्राप्ति एक लंबी यात्रा है जिसमें कई जन्म लगते हैं और मनुष्य जीवन का अंतिम लक्ष्य मोक्ष की प्राप्ति ही है। ध्यान आपको मोक्ष की प्राप्ति की यात्रा में आगे बढ़ाता है। मैं ऐसा बिल्कुल नहीं मानता हूँ किससे विपश्यना ही मोक्ष प्राप्ति का एक रास्ता है। मोक्ष प्राप्ति के रास्ते तो हजारों में है लेकिन चुनाव आपके ऊपर है कि आप कौन-सा रास्ता चुनते हैं। मंज़िल तो एक ही है-मोक्ष।

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