दिवाली के पीछे का वैज्ञानिक कारण # The scientific Reason Behind #Deepavali?

 दिवाली के पीछे का वैज्ञानिक कारण

The scientific Reason Behind Deepavali

#दीपावली  शब्द का अर्थ होता है दीप+अवली । दीप मतलब दीया और आवली का मतलव होता है एक सीधी पंक्ति । यानी कि दीपों की पंक्तियाँ । 

           आपने देखा होगा की पारंपरिक तौर से दीपावली में दीपों को पंक्तिवद्ध सजाया जाता है और यही दीपावली की अपने आप में एक ख़ास विशेषता है।

              आइये आज दीपावली के पीछे छुपे क्या  हैं  विज्ञान , इसको समझने का आज प्रयास करतें हैं।  हम सदियों से दिवाली मनाते आ रहे हैं। 

            लेकिन दीपावली के दिन पारंपरिक रूप से होने वाले अनुष्ठानों के पीछे के कारणों का पता लगाने के लिए आज हम गहरी खोज करने वालें हैं।

हमें कुछ तथ्यों का पता चला, जो इन अनुष्ठानों के बारे में बहुत कुछ वैज्ञानिक संकेत देतें हैं।

 (1) कीड़ों-मकोड़ों से छुटकारा पाने के लिए मानतें हैं दीपावली:

#Deepawali is celebrated to Get rid of insects

वर्षात के मौसम कि समाप्ति के पश्चात दीपावली का महापर्व मनाया जाता है। वर्षात के मौसम में कीड़े-मकोड़े ज़्यादा पनपतें हैं।

           दीपावली में जब एक साथ सारी दुनियाँ दीया जलातीं हैं, तो दीये से निकलने वाला धुआं वातावरण में पाए जाने वाले बैक्टीरिया को मारता है। 

               दीया कीट-पतंगों और कीड़े-मकोड़े को अपनी ओर आकर्षित करतीं हैं। और जब कीड़े मकोड़े दीपक के संपर्क में आतें हैं तो जल जातें हैं। इस प्राकर कीड़े-मकोड़े से निजात मिलता है।


 (2.) स्वास्थ्य की रक्षा के लिए मानतें है दीपावली:

celebrated To Protect Our Health

दीपावली उस समय मनाया जाता है जब मौसम बदल रहा होता है। मौसम में परिवर्तन के कारण लोगों को सर्दी, खांसी, बुखार जैसी बीमारियाँ होने लगतीं हैं।अचानक ठंढ का मौसम आने से लोग बीमार होने लागतें  हैं।

               जब एक साथ दिया जलाया जाता है तो पर्यावरण में गर्मी पैदा होती है।और लोग कम बीमार पडतें हैं। 

              मौसम में हुए इस  बदलाव से आदमी को थोडा वक़्त मिल जाता है और लोगों का शरीर ठंढे वातावरण में समायोजित हो जाता है।


 (3.) साफ़-सफाई के लिए मानतें है दीपावली:

Deepawali is celebrated for cleanliness

सनातन धर्म में वर्ष में एक दिन ऐसा सुनिचित किया जाता है जिस दिन पूरे तरीके से घरों की साफ-सफाई की जाए।

           घर के आस-पास या घर में, वर्षात के मौसम में फैले गन्दगी को सफ़ाई करने के लिए दीपावली का त्यौहार मनाया जाता है।

         वर्षात के मौसम के कारण गन्दगी को सफाई करके  घरों का रंग-रोगन किया जाता है ताकि पूरे वर्ष लोग साफ़ घर में रह सकें।


 (4.) शुभ आत्माओं को मुक्ति के लिए मनाया जाता है दीपावली:

Deepawali is celebrated for the liberation of auspicious souls.

कार्तिक महीने में कृष्ण पक्ष की चतुर्थी को यानी दीपावली जिस दिन मनाया जाता है ,उससे एक दिन पूर्व भगवान् कृष्ण ने नरकासुर का वध किया था , और हजारों पीड़ित आत्माओं को मुक्ति मिली 

           वौद्ध लोग इस दिन को निर्वान दिवस के रूप में मानतें हैं। दीपावली के दिन ही महावीर और दयानंद सरस्वती ने निर्वाण लिया था।

           ऐसी मान्यता है कि नरकासुर जब मारा था उस दिन बहुत सारे पुण्य आत्माओं को मुक्ति मिली थी। इस लिए इस दिन को आत्मा की मुक्ति दिवस के रूप में मनातें हैं। 

          यह बुराई पर अच्छाई की जीत, अंधेरे पर प्रकाश की जीत और बुराई पर अच्छाई की जीत का पर्व है। 

           क्योकि दीपावली के दिन ही भगवान् राम रावण को मारकर लंका से अयोध्या लौटे थे तो अयोध्या वासीयों ने भगवान् राम का रास्ता कतारवद्ध दीयों को जलाकर किया था।

         यानी भगवान राम और भगवान् कृष्ण दोनों, इसी दिन बुराई को ख़त्म करके अच्छाई की स्थापना की थी इस कारण दीपावली को बुराई पर अच्छाई की जीत का पर्व मानतें है।


 (5.) चन्द्रमा की गति पर आधारित है दीपावली:

Deepawali is based on the movement of the moon.

ज्योतिष शास्त्र की मानें तो दीपावली चन्द्रमा के घूर्णन और परिक्रमण के अनुसार मनाया जाता है 

            दीपावली और जितने भी पर्व मनाएँ जातें है वह सभी सूर्य के गति पर आधारित होतें हैं। इसी कारण से दीपावली हर वर्ष अलग-अलग तिथि को मनाया जाता है।


 (6.) आध्यात्मिक दृष्टि से उत्तम तिथि है दीवाली का दिन:

Diwali is the best date from a spiritual point of view:


इस दिन हमारे महान आत्माओं ने कई उल्लेखनीय कार्य कियें हैं। जैसे राजा विक्रमादित्य का राज-तिलक दीपावली के दिन ही हुआ था।

           सिख समाज के लोगों ने अमृतसर के गोल्डन टेम्पल का नींव दीपावली के दिन ही रखा था । 

        जीवन में वैभव देने वाली लक्ष्मी माता और कुबेर महाराज की पूजा-अर्चना भी दीपावली के दिन ही होती है।


 (7.) फ़सल की रक्षा के लिए मनाया जाता है दीपावली:

Deepawali is celebrated to protect the crop:

 क्योंकि यह समय नए फ़सल के बुआई का होता है और इस समय कीट-पतंगों की संख्या नियंत्रण से बाहर होती है 

             क्योंकि पहले कीटनाशक का प्रयोग नहीं होता था और लोग जीवों को मारना अधर्म मानते थे। तो एक साथ दीप जलाकर कीट पतंग के विनाश के लिए दीपावली पर ज़ोर दिया जाने लगा।

              क्योंकि कीट-पतंग का एक स्वाभाविक गुण होता है कि वे दीये की रौशनी की तरफ़ आकर्शि होकर अपनी जान दे देतें हैं। और लोगों को पाप भी नहीं लगता।


 (8.) एक साथ इकट्ठा होने का अवसर देता है दीपावली:

Deepawali gives an opportunity to gather together

दीपावली लोगों को मिलाने का अवसर प्रदान करता है। परिवार, गाँव, समाज के लोग जो घर से बाहर रहतें हैं वह भी दिवाली में घर आतें हैं घर के लोगों से, गाँव समाज के लोगों से मिलतें हैं 

        सभी मिल-जुल  कर त्यौहार मानतें हैं,  इससे समाज में प्रेम और समरसता आता है ,लोग एक साथ बैठ कर सामजिक स्थितियों पर विचार करतें हैं।जिसके कारण एक उन्नत समाज का निर्माण होता है।


 (9.) दीपक की रौशनी हमारे शारीरिक मैग्नेटिक फील्ड को प्रभावित करती है:

The light of Deep affects our physical magnetic field

मनुष्य के शरीर में एक प्रकार का चुम्बकीये प्रवाह होता है जो अनेक बाहरी कारणों से प्रभावित होता है। दीपक की रौशनी इस पर साकारात्मक प्रभाव डालता है। 

             यही वज़ह है कि आपने सुना होगा कि किसी ख़ास धार्मिक कर्मकांडों में ख़ास प्रकार के तेल से दिया जलना होता है , जैसे कि घी के दीये, तिल के तेल के दीये या सरसों के तेल के दीये।  ये अलग-अलग ढंग से हमें प्रभावित करतीं हैं।

        दीये की रौशनी सीधे तौर पर मनुष्य के रक्त और कोशिकाओं को प्रभावित करतीं हैं उन्हें उर्जावान बनातीं हैं और प्रतिरक्षा प्रणाली को मज़बूत बनाती है जिसके कारण आदमी नीरोग रहता है।


 (10.) चर्मरोग से मुक्ति, मोटापा से मुक्ति और लम्बी उम्र के लिए मनाया जाता है दीपावली:

Deepavali is celebrated for getting rid of skin diseases, freedom from obesity and long life.

छोटी दीपावली के दिन "अभ्यंग स्नान" करने की परंपरा थी जो अब बहुत कब जगहों पर मनाया जाता है।


"अभ्यंग स्नान" करने का तरीका 

Method Of "Abhyanga Bath" Bath 

          "अभ्यंग स्नान" करने के लिए अपामार्ग की पत्तीओं को पानी में उबाल कर ठंढे पानी में मिलाया जाता है और शरीर पर तिल के तेल से मालिस करके थोडा समय धूप में बैठने के बाद उस अपामार्ग की पानी से स्नान किया जात है।


"अभ्यंग स्नान" स्नान का वैज्ञानिक  कारण: 

Scientific reason for this Abhyanga Bath

आलस्य का नाश होता है, त्वचा के फटने से बचाव होता है, नाकारात्मक उर्जा नष्ट होती है और मोटापा घटता है।

इस स्नान का पौराणिक कथा: 

Mythology of Abhyanga Bath

भगवान् कृष्ण जब अपनी पत्नी सत्यभामा के साथ राक्षस नरकाशुर का वध किये थे उसके बाद "अभ्यंग स्नान" किये ।

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