फैटी लीवर के लक्षण, कारण और प्राकृतिक उपचार

 फैटी लीवर के लक्षण, कारण और प्राकृतिक उपचार

लीवर आपके शरीर की सम्पूर्ण कार्यप्रणाली को नियंत्रित करती है। यह भोजन को आवश्यक तत्व में परिवर्तित करने में, भोजन में मिले हानिकारक और विषाक्त पदार्थों को छानने, प्रोटीन को तोड़ने, पित्त का निर्माण करने और रक्त के थक्के बनाने में मदद करने सहित और कई कार्य करता है। रोगजनकों को हटाने और संक्रमण से लड़ने में लिवर / यकृत आपके प्रतिरक्षा प्रणाली को बजबूत बनता है। यह हार्मोन को नियंत्रित और निर्देशित भी करता है। इन कई कार्यों के साथ, यकृत को बीमारी से बचाना महत्त्वपूर्ण है।

फैटी लिवर की बीमारी तब होती है जब लिवर में वसा का निर्माण होने लगता है। यह बहुत अधिक शराब पीने और ज़्यादा तैलिये पदार्थ खाने के कारण हो सकता है, लेकिन जो लोग शराब का सेवन नहीं करते हैं उन्हें भी यह बीमारी हो सकती है। जब फैटी लीवर रोग शराब के अलावा अन्य कारकों के कारण होता है।

फैटी लीवर के लक्षण :

फैटी लिवर एक धीमी प्रक्रिया है जो शुरूआती दौर में लोगों को पता भी नहीं चलता है और अक्सर लोग तब तक इसपर ध्यान नहीं देतें है जबतक की यह एक समस्या के रूप में न सामने आ जाए।

1. लिवर में सूजन होने का पहला लक्षण यह है कि फैटी लिवर होने पर मरीज को हमेशा थकान महसूस होता है।

2. गैस बनाना, पेट फूलना और अपच की समस्या होना।

3. फैटी लिवर ज़्यादा समयतक रहने पर आगे चलकर जॉन्डिस, हेपटाईटिस-बी का ख़तरा तो रहता ही है, आगे चलकर लिवर कैंसर का रूप भी ले सकता है।

फैटी लीवर के रिस्क फैक्टर :-

** फैटी लिवर होने से शुगर की बिमारी हो सकती है।

** मोटापा की बीमारी हो सकती है। जिसको  obesity कहतें हैं।

** ट्राइग्लिसराइड का लेवल भी बढ़ सकता है।

ट्राइग्लिसराइड्स एक प्रकार का फैट है। जो विशेष रूप से तेल और अन्य खाए जाने वाले अन्य वसा युक्त खाद्य पदार्थों से आते हैं। और शरीर को जब वासा की ज़रूरत नहीं होती तब ट्राइग्लिसराइड्स में बदल कर आपके शरीर में स्टोर हो जाता है।

 फैटी लीवर के लिए क्या-क्या हैं  सावधानियाँ:-

1. शराब के सेवन से बचना,

2. फ़ास्ट फ़ूड और जंक फ़ूड से परहेज करना,

3. रोज़ व्यायाम करना।

4. खानपान में बदलाव करके वज़न को घटाना

5. खानपान के आदतों में सुधार करके आप कार्बोहायड्रेट, फैट और शुगर पर कण्ट्रोल कर सकतें हैं।

6. बिना डॉक्टर के सलाह लिए फालतू दवाओं से परहेज करना चाहिए और

7. वार्षिक लिवर का चेकअप कराएँ।

8. हमेशा तनाव में रहना भी फैटी लिवर का कारण बन सकता है।

9. लगातार ज़्यादा काम दवाब होना भी इसका एक कारन है।

10. काम पोषक वाले खाद्य पदार्थों का सेवन करना।

11. और राम रस का सेवन करना - राम रस एक साधारण आयुर्वेदिक पेय है जो फैटी लीवर में असाधारण रूप से कार्य करता है और आपके पैसे बचाता है. 

लिवर के कार्य

** लीवर भोजन को पचाने और ऊर्जा में इसके विभिन्न पोषक तत्वों को एनर्जी में बदल देता है।

** कम भोजन सेवन या उपवास में लिवर केटोन बॉडीज का  कार्य करता है जो हृदय, मस्तिष्क और मांसपेशियों में ऊर्जा के रूप में उपयोग किया जाता है।

** खून को जमने में लिवर ही जिम्मेवार होता है। अगर लिवर नहीं हो जो काटने पर शरीर खून निकलना बंद नहीं होगा और जीव मर जाएगा।

फैटी लिवर रोग के लक्षण

१. फैटी लीवर होने पर आमतौर पर पेट के उपरी भाग में दाहीने तरफ  दर्द होता है।

२. हमेशा थकान महसुश होना। 

३. भूख में कमी होने लगना 

४. जी मचलना। 

५. पेट में सुजन होना। 

6 आँखें पीला होना। 

७. पुरुषों में बढे हुए स्तन का होना। 

८. हथेलियों का लाल होना। 

९. त्वचा पर नशों का दिखना। 

१०. त्वचा पीला होना।    

लीवर के लिए प्राकृतिक रणनीतियाँ 

 लिवर के  स्वास्थ्य के लिए कई प्राकृतिक रणनीतियाँ हैं। जिसमे आपका  जीवन शैली महत्वपूर्ण है। अन्य रणनीति के साथ-साथ  खाद्य पदार्थों और जड़ी-बूटियों का सेवन यकृत के स्वास्थ्य को ठीक रखती हैं। इस लिए आपको निम्नलिखित जीवन शैली अपनाना चाहिए। 

 १. कभी-कभी  उपवास करना चाहिए।

२. खूब पानी पीना चाहिए। 

३. तनाव मुक्तत रहना चाहिए। 

४. भरपूर नींद लेना चाहिए।  

५. फाइबर युक्अत आहार लेना चाहिए।

६. मोर्निंग वाक करना चाहिए। 

७. योगा करना चाहिए। 

८. मंशाहार कम लेना चाहिए।

9. चीनी का सेवन कम करना चाहिए .

10. प्रोसेस्ड फ़ूड और vegitable oil नहीं लेना चाहिए .

11. रोज सवेरे ऊठ कर भर पेट पानी पीना  एक आपके स्वास्थ के लिए  शानदार लाइफ स्टाइल है।  आपको सुबह में पहला काम ये करना चाहिए की आप अपने शरीर को  हाइड्रेटकरें। काम से काम एक लीटर पानी पीना बेहतर है। 

12.रोज सवेरे ऊठ कर भर पेट पानी पीना  एक आपके स्वास्थ के लिए  शानदार लाइफ स्टाइल है।  आपको सुबह में पहला काम ये करना चाहिए की आप अपने शरीर को  हाइड्रेटकरें। काम से काम एक लीटर पानी पीना बेहतर है। 

फैटी लीवर वालों को क्या-क्या खाना 

१. कम मात्रा में कार्बोहायड्रेट - कम कार्बोहाइड्रेट वाली सब्जियों में खीरे, शतावरी और पत्तेदार साग शब्जियाँ  शामिल हैं।

२. आर्गेनिक हरी और पत्तेदार  शब्जियाँ। सब्जियां और फल एंटी-इंफ्लेमेटरी एंटीऑक्सिडेंट और फाइटोन्यूट्रिएंट्स में उच्च होते हैं जो लिवर के स्वास्थ्य के लिए बहुत अच्छे होते हैं।

३.  कम ग्लाइसेमिक वाले फल खाना चाहिए जैसे की  - जामुन, अंगूर, नीबू, नींबू और  सेब में कम ग्लाइसेमिक पाए जातें हैं , तो इसका इस्तेमाल करना बेहतर है ।  




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