गरुड़ पुराण कब पढ़ना चाहिए ? When should we read Garuda Purana?

 गरुड़ पुराण कब पढ़ना चाहिए ?

 When should we read Garuda Purana?

 

 गरुड़जी महाराज,  ऋषि कश्यप के पुत्र हैं  तथा भगवान विष्णु के वाहन के रूप मे कार्य करतें हैं ।कथा है कि  एक बार गरुड़ महाराज जी  ने भगवान विष्णुजी  से पृथ्वी के मनुष्यों तथा अन्य उत्तम जीवों की मृत्यु के बारे में ,  यमलोक यात्रा के बारे में और मोक्ष के बारे में कई प्रकार के गूढ़ और रहश्यपूर्ण प्रश्न पूछे। 

      तो उस समय भगवान विष्णुजी  ने गरुड़-महाराज की जिज्ञासा को  शांत करते हुए उनके द्वारा पुछे गए प्रश्नों का जो उत्तर दिया वही बात गरुड़ पुराण में बताया गया है। इस गरुड़ पुराण में गरुड़जी महाराज  के प्रश्न और भगवान विष्णुजी  के उत्तर का एक संग्रह है। सनातन धर्म में मृत्यु के पश्चात गरुड़ पुराण के पाठ को सुनने का विधान है।

   गरुड़ पुराण मे  मृतक की आत्‍मा की शांति के नियम और उपाय के बारे में मार्ग दर्शाया गया है । मृत्‍यु के पश्‍चात 12-13 दिनों तक घर मे गरुड़ पुराण का पाठ किया जाना अनिवार्य माना जाता  है। इससे मृतक की आत्‍मा को शांति प्राप्‍त होती है। घर में किसी वृद्ध  कि मृत्यु का क्षण आ गया हो तो उनको गरुड़ पुराण का पाठ सुनना उनके अगले जीवन के लिए अच्छा माना गया है । और क्योकि मृत्यु के बाद 13 दिनों तक आत्मा मोहवश अपने पूर्व घर मे ही रहता है । इस कारण 13 दिनो तक गरुड़ पुराण का पाठ करना उचित माना जाता है ताकि उस आत्मा का मोह भंग हो और वह अगली यात्रा के लिए प्रस्थान करे । 

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